HR

HR @ Kitli 1 & 2

We HR professionals usually find our self either in the AC chamber or conference hall to discuss or deliberate any issue in a formal atmosphere. With the NATURE in mind a thought came, why can’t we discuss HR issues in Open air in an informal atmosphere. “Mind is like a parachute – it works when open, but to get mind open we need space.” We had first HR @ Kitli on 13th May 2017 with 10 participant at Appna  Adda, S G High way Nr. Manan motors Ahmedabad. Though it was at first looks very discouraging but ultimately when discussion took place for almost an hour, it was so encouraging, enlighten and with lots of participation, It was discuss and decided to continue this initiative every Second Sunday of the month from 8.00 am to 9.30 am. We discussed why so thin number on Sunday morning...

HR@Kitli – 1

The first HR@Kitli was organized on 14th May 2017 with intention to meet informally on every second sunday of the month for 1and half hours in open place to discuss HR.

HR@Kitli – 2 : Law Garden

As a part of our new initiative, we are organizing 2nd HR@KITLI at Law garden- Ahmedabad. This is without agenda informal format of discussing HR in open and enhance out NEW WORTH by way of NET WORK. All HR@Kitli will be on Second Sunday of the Month.  

गिद्धों का एक झुण्ड खाने की तलाश में भटक रहा था

गिद्धों का एक झुण्ड खाने की तलाश में भटक रहा था ।उड़ते – उड़ते वे एक टापू पे पहुँच गए। वो जगह उनके लिए स्वर्ग के समान थी। हर तरफ खाने के लिए मेंढक, मछलियाँ और समुद्री जीव मौजूद थे और इससे भी बड़ी बात ये थी कि…वहां इन गिद्धों का शिकार करने वाला कोई जंगली जानवर नहीं था और वे बिना किसी भय के वहां रह सकते थे। युवा गिद्ध कुछ ज्यादा ही उत्साहित थे, उनमे से एक बोला,” वाह ! मजा आ गया, अब तो मैं यहाँ से कहीं नहीं जाने वाला, यहाँ तो बिना किसी मेहनत के ही हमें बैठे -बैठे खाने को मिल रहा है!” बाकी गिद्ध भी उसकी हाँ में हाँ मिला ख़ुशी से झूमने लगे। सबके दिन मौज -मस्ती में बीत रहे थे लेकिन झुण्ड का सबसे बूढ़ा गिद्ध इससे खुश नहीं था। एक दिन अपनी चिंता जाहिर करते हुए वो बोला, ” भाइयों, हम गिद्ध हैं, हमें हमारी ऊँची उड़ान और अचूक वार करने की ताकत के लिए जाना जाता है। पर जबसे हम यहाँ आये हैं हर कोई आराम तलब...

HR की विडंबना

किसी भी कम्पनी मे आपने देखा होगा की लोग किसी भी इनफर्मेशन के लिए HR विभाग के सदस्यों की ओर देखते है। ये माना जाता है कि HR विभाग मे कार्यरत व्यक्ति को हर विषय की जानकारी होगी चाहे वो इंक्रिमेंट हो या प्रमोशन हो या किसी पर कायर्वाही की जानकरी हो। अब विडम्बना देखे HR की, उसे सब के बारे में जानकारी होती है पर खुद के …. एक पागल खाने मे एक पागल कुछ लिख रहा था। किसी समझदार ने उस पागल से पूछा क्या लिख रहे हो? पागल बोला, चिट्ठी लिख रहा हूँ। समझदार ने पूछा ” किसको लिख रहे हो?” पागल बोला खुद को लिख रहा हु। इस पर समझदार ने पूछ लिया ” चिट्ठी मे क्या लिखा है?” अब जो पागल ने बताया वो एक HR वाला अपने आप को इस जवाब के खूब करीब मे पायेगा। पागल ने उस समझदार को कहा ” जनाब, मै चिट्ठी लिख रहा हु , खुद को लिख रहा हु पर मुझे नहीं पता उस चिट्ठी मे क्या लिखा है क्योंकि चिट्ठी अभ...

Refuse Salary Proof

  Why you should refuse to provide proof of your previous salary. By Sanjana Ray One of the most nerve-wracking moments in an interview with a prospective employer is the awkward pause after all the general questions are wrapped up and the cross-referencing questions begin. Some of the common ones include, “Why would you want to join this company over others like…?”, “Why did you leave your last job?” and the most dreaded, “Could you provide us with proof to your previous salary?” In all of these questions, the use of smart diplomacy in your responses is of course recommended. But amidst the flow of these ‘pretty standard’ questions, it is imperative to understand when a question goes from being general to overly personal. For instance, a prospective employer asking an interviewee to ...

Problem solving & Decision making

Decision-making, in brief, is selecting a course of action from alternatives.  In actual practice, decision-making should be thought of as a process which includes five steps:   Define the problem. Few problems are really clear cut, and usually the symptoms are more apparent than the causes.  Symptoms offer valuable clues to underlying problems, but until you have identified the real problem, or problems, you’re not ready for Step 2.   Gather the facts and data. Decision-making requires that you gather all the data that might have a bearing on the problem.  For the most part, data will consist of facts, opinions and assumptions obtained from observations, records, or other people.  If key information is not available, delay your decision until you get it.  In some cases, ho...

7 Things Emotionally Intelligent People Don’t Do

The restaurant manager who speaks with poise and grace to the patron complaining loudly about the wait service. The levelheaded friend you call in your greatest times of need. The compassionate but composed rescue worker who aids victims after a natural catastrophe. The partner who angers rarely, forgives easily, and assumes accountability for their actions. The successful CEO who balances her profession, her family responsibilities, and her personal hobbies with equal measures of calm and confidence. What do these people have in common? In two words: Emotional Intelligence. A relatively new trend in the realm of pop culture and psychology today, Emotional Intelligence — or EQ — has existed since the beginning of time. According to Psychology Today, the preeminent site for mental health ed...

समय के आगे….

आप सभी ने टोपीवाला और बन्दर की कहानी सुनी होगी। आज कुछ आगे क्या हुआ उसे पढें। दो छोटे छोटे गॉव थे | दोनों गॉवो के बीच जंगल था | इस जंगल मे बहुत सारे बन्दर थे | एक दिन एक टोपीवाला टोपियां बेचने के लिए इस जंगल से होकर दूसरे गॉव जा रहा था | वह चलते चलते थक गया | उसने अपना टोपियों से भरा संदूक एक पेड़ के निचे रखा और बैठकर आराम करने लगा | थोड़ी ही देर मे उसे नींद आ गयी |जब टोपीवाले की नींद खुली, तो वह चौक उठा | उसका संदूक खुला था और सारी टोपियां गायब थी | इतने मे उस बंदरो की आवाज सुनाई दी | उसने ऊपर देखा | उस पेड़ पर बहुत सारे बन्दर बैठे थे | सभी बंदरो ने अपने सर पर टोपी पहनी थी | टोपीवाले को बहुत गुस्सा आया | उसने पथ्थर उठा उठा कर बंदरो को मारना शुरू कर दिया | उसकी नक़ल करते हुए बंदरो ने भी पेड़ से फल तोड़ तोड़ कर टोपीवाले की और फेखना शुरू कर दिया | अब टोपीवाले कीसमझ मे आ गया की वह बंदरो से टोपिया कै...

Cost To Company

Cost to Company ( CTC ) क्या है? बार बार ये सवाल HR Professionals को परेशान करता रहता है। तनख़ाह के अलावा अगर कम्पनी घर देती है या अन्य सुविधा देती है तो क्या वो CTC में गिने जायेंगे? चलो इसे एक आसान तरीके से समझने की कोशिश की जाय। एक शहर मे एक व्यक्ति पोल्ट्री फार्म चलता था। काफी सारी मुर्गी उस पोल्ट्री फार्म मे होती थी । ये व्यवसाय अच्छा चल रहाथा। एक दिन , एक सरकारी अफसर इस पोल्ट्री फार्म पर आता है और मालिक से पूछा ” मुर्गी को क्या खिलते हो?” मालिक ने बताया कि “साहब , हम मुर्गियो को मिनरल पानी पिलाते हैं और अच्छे से अच्छि क्वालिटी के दाने खिलते हैं।” इस पर सरकारी अफसर ने बताया कि वो इंकंटेक्स विभाग से हैं, और इस व्यवसाय मे इतना मुनाफा ही नहीं है कि आप मुर्गीओ को ये सब खिला पिला सको। बेचारे मालिक के खिलाफ चालान बन गया। दुखी मालिक ने फिर अपना व्यवसाय आरम्भ किया, अच्छ...

बैंगन का भरता

जिंदगी के कीमती वर्ष HR में गुजारने के बाद भी असमंजस ही रहता है की मुझे Employer की तरफ या Employee की तरफ रहना चाहीए? दोनों के बीच का बेलैंस तो दूर की ही बाद है। इसे समझने का इस कहानी से अच्छा ओर क्या तरीका हो सकता है। एक राजा था, जिसका रसोइया सीताराम था। सीताराम काफी वर्षों से राजा को अच्छे से अच्छा खाना बनाता एवं राजा का काफी करीबी माना जाता था। एक दिन सीताराम ने बैंगन का भरता बनाया । राजा उस दिन काफी खुश था । राजा ने बैंगन के भरते की काफी तारीफ की। राजा ने कहा “सीताराम, क्या भरता बनाया है” ! सीताराम ने भी बैंगन की काफी तारीफ की और कहा साहब बैगन चीज़ ही ऐसी है – गोल गोल , मोटा मोटा… फिर कुछ दिन बाद सीताराम ने वही बैंगन का भरता बनाया। वही स्वाद था । परंतु आज राजा का मन खुश न था। राजा ने कहा ” सीताराम क्या भरता बनाया है”! सीताराम ने भी बैंगन की बुराई की ...

Lost Password

Register

Skip to toolbar