Hindi stories on management

गिद्धों का एक झुण्ड खाने की तलाश में भटक रहा था

गिद्धों का एक झुण्ड खाने की तलाश में भटक रहा था ।उड़ते – उड़ते वे एक टापू पे पहुँच गए। वो जगह उनके लिए स्वर्ग के समान थी। हर तरफ खाने के लिए मेंढक, मछलियाँ और समुद्री जीव मौजूद थे और इससे भी बड़ी बात ये थी कि…वहां इन गिद्धों का शिकार करने वाला कोई जंगली जानवर नहीं था और वे बिना किसी भय के वहां रह सकते थे। युवा गिद्ध कुछ ज्यादा ही उत्साहित थे, उनमे से एक बोला,” वाह ! मजा आ गया, अब तो मैं यहाँ से कहीं नहीं जाने वाला, यहाँ तो बिना किसी मेहनत के ही हमें बैठे -बैठे खाने को मिल रहा है!” बाकी गिद्ध भी उसकी हाँ में हाँ मिला ख़ुशी से झूमने लगे। सबके दिन मौज -मस्ती में बीत रहे थे लेकिन झुण्ड का सबसे बूढ़ा गिद्ध इससे खुश नहीं था। एक दिन अपनी चिंता जाहिर करते हुए वो बोला, ” भाइयों, हम गिद्ध हैं, हमें हमारी ऊँची उड़ान और अचूक वार करने की ताकत के लिए जाना जाता है। पर जबसे हम यहाँ आये हैं हर कोई आराम तलब...

समय के आगे….

आप सभी ने टोपीवाला और बन्दर की कहानी सुनी होगी। आज कुछ आगे क्या हुआ उसे पढें। दो छोटे छोटे गॉव थे | दोनों गॉवो के बीच जंगल था | इस जंगल मे बहुत सारे बन्दर थे | एक दिन एक टोपीवाला टोपियां बेचने के लिए इस जंगल से होकर दूसरे गॉव जा रहा था | वह चलते चलते थक गया | उसने अपना टोपियों से भरा संदूक एक पेड़ के निचे रखा और बैठकर आराम करने लगा | थोड़ी ही देर मे उसे नींद आ गयी |जब टोपीवाले की नींद खुली, तो वह चौक उठा | उसका संदूक खुला था और सारी टोपियां गायब थी | इतने मे उस बंदरो की आवाज सुनाई दी | उसने ऊपर देखा | उस पेड़ पर बहुत सारे बन्दर बैठे थे | सभी बंदरो ने अपने सर पर टोपी पहनी थी | टोपीवाले को बहुत गुस्सा आया | उसने पथ्थर उठा उठा कर बंदरो को मारना शुरू कर दिया | उसकी नक़ल करते हुए बंदरो ने भी पेड़ से फल तोड़ तोड़ कर टोपीवाले की और फेखना शुरू कर दिया | अब टोपीवाले कीसमझ मे आ गया की वह बंदरो से टोपिया कै...

History repeats : Learn from it

ऐसा कहते हैं कि इतिहास दोहराता है क्योंकि हम इतिहास से कुछ सिखते नहीं है। एक बार कुछः वैज्ञानिको ने एक बड़ा ही दिलचस्प प्रयोग किया। उन्होंने पांच बंदरों को एक बड़े से पिजड़े में बंद कर दिया और बीचों -बीच एक सीढ़ी लगा दी जिसके ऊपर केले लटक रहे थे। जैसे ही एक बन्दर की नज़र केलों पर पड़ी वो उन्हें खाने के लिए दौड़ा , पर उसने कुछ सीढ़ियां चढ़ीं उस पर ठण्डे पानी की तेज धार डाल दी गयी और उसे उतर कर भागना पड़ा। एक बन्दर के किये गए की सजा बाकी बंदरों को भी मिलि और सभी को ठन्डे पानी से भिग न पड़ा । बेचारे सारे बन्दर हक्का-बक्का एक कोने में दुबक कर बैठ गए । पर वे कब तक बैठे रहते , कुछ समय बाद एक दूसरे बन्दर को केले खाने का मन किया , और वो उछलता कूदता सीढ़ी की तरफ दौड़ा …अभी उसने चढ़ना शुरू ही किया था कि पानी की तेज धार से उसे नीचे गिरा दिया गया … और इस बार भी इस बन्दर के गुस्ताखी की सजा बाकी बंदरों को भी दी गयी ।...

Cost To Company

Cost to Company ( CTC ) क्या है? बार बार ये सवाल HR Professionals को परेशान करता रहता है। तनख़ाह के अलावा अगर कम्पनी घर देती है या अन्य सुविधा देती है तो क्या वो CTC में गिने जायेंगे? चलो इसे एक आसान तरीके से समझने की कोशिश की जाय। एक शहर मे एक व्यक्ति पोल्ट्री फार्म चलता था। काफी सारी मुर्गी उस पोल्ट्री फार्म मे होती थी । ये व्यवसाय अच्छा चल रहाथा। एक दिन , एक सरकारी अफसर इस पोल्ट्री फार्म पर आता है और मालिक से पूछा ” मुर्गी को क्या खिलते हो?” मालिक ने बताया कि “साहब , हम मुर्गियो को मिनरल पानी पिलाते हैं और अच्छे से अच्छि क्वालिटी के दाने खिलते हैं।” इस पर सरकारी अफसर ने बताया कि वो इंकंटेक्स विभाग से हैं, और इस व्यवसाय मे इतना मुनाफा ही नहीं है कि आप मुर्गीओ को ये सब खिला पिला सको। बेचारे मालिक के खिलाफ चालान बन गया। दुखी मालिक ने फिर अपना व्यवसाय आरम्भ किया, अच्छ...

बैंगन का भरता

जिंदगी के कीमती वर्ष HR में गुजारने के बाद भी असमंजस ही रहता है की मुझे Employer की तरफ या Employee की तरफ रहना चाहीए? दोनों के बीच का बेलैंस तो दूर की ही बाद है। इसे समझने का इस कहानी से अच्छा ओर क्या तरीका हो सकता है। एक राजा था, जिसका रसोइया सीताराम था। सीताराम काफी वर्षों से राजा को अच्छे से अच्छा खाना बनाता एवं राजा का काफी करीबी माना जाता था। एक दिन सीताराम ने बैंगन का भरता बनाया । राजा उस दिन काफी खुश था । राजा ने बैंगन के भरते की काफी तारीफ की। राजा ने कहा “सीताराम, क्या भरता बनाया है” ! सीताराम ने भी बैंगन की काफी तारीफ की और कहा साहब बैगन चीज़ ही ऐसी है – गोल गोल , मोटा मोटा… फिर कुछ दिन बाद सीताराम ने वही बैंगन का भरता बनाया। वही स्वाद था । परंतु आज राजा का मन खुश न था। राजा ने कहा ” सीताराम क्या भरता बनाया है”! सीताराम ने भी बैंगन की बुराई की ...

गधे की लात

कहते है कि गधे की लात से कभी गधा मरा नहीं है। परंतु ये भी बात इतनी सही है कि अपने ही अपने को मारते है।HR के recruiter में HR ही सबसे ज्यादा परेशांन करते है। इस से के कहानी याद आती है : एक बार एक कुत्ते और गधे के बीच शर्त लगी कि जो जल्दी से जल्दी दौडते हुए दो गाँव आगे रखे एक सिंहासन पर बैठेगा… वही उस सिंहासन का अधिकारी माना जायेगा, और राज करेगा. जैसा कि निश्चित हुआ था, दौड शुरू हुई. कुत्ते को पूरा विश्वास था कि मैं ही जीतूंगा. क्योंकि ज़ाहिर है इस गधे से तो मैं तेज ही दौडूंगा.  पर अागे किस्मत में क्या लिखा है … ये कुत्ते को मालूम ही नही था. शर्त शुरू हुई. कुत्ता तेजी से दौडने लगा.  पर थोडा ही आगे गया न गया था कि अगली गली के कुत्तों ने उसे देख काटने, भौंकने और पकड़ने लगे.  और ऐसा हर गली, हर चौराहे पर होता रहा.. जैसे तैसे कुत्ता बचता बचाता, हांफते हांफते सिंहासन के पास पहुंचा.. तो ...

कॉर्पोरेट पोलिटिक्स

  हम  अक्सर बात करते है कि कंपनी मे बहुत पॉलिटिक्स हे, लोग बहुत गेम खेलते है, मजा नहीं आता…… पर सबसे बड़ा सवाल ये है कि लोग ये कहा से सीखते है, कोई स्कूल मे या कॉलेज मे तो पढ़ाया नहीं जाता । फिर ये कहा से आता है? बहुत सोचा तब कही मै इस समस्या की नींव तक पहुच सका। एक बार शाम को घर पंहुचा। श्रीमती ने खाने के सुझाव मांगे औऱ मेरे हर सुझावो को एक या दुसरे कारण से नकार दिए गए। मैने कहा, आलू बना लो – कारण दिया आलू गैस करते हैं। मैने कहा भिन्डी बना लो- जवाब दिया अभी तो खाइ थी। औऱ अंत मे श्रीमति ने कहा बैगन कैसा रहेगा? मेरे पास कोई जवाब नहीं था बल्कि हाँ ही कहना था। श्रीमति हँसती हुई  डिनर बनाने चली गई। डिनर टेबल पर जब खाना आया, हमारी बेटी चिल्लाई, ” मम्मी ये क्या सब्जी बनाई है? You don’t have choice”. दोस्तों यही से बच्चे पॉलिटिक्स की A B C D सिखते हैं। बेट...

मैनेजेरियल ईगो

  मैनेजेरियल ईगो क्या होती है? ये तब पता चला जब एक कंपनी के बॉस ने आदत बनारखी थी की कोई भी पत्र कितना भी अच्छा औऱ सही लिखा हो ये साहब कुछ छोटी मोटी गलती निक्सल कर वापस भेजदेते। परेशान हो कर हम एक सहलाकर क़े पास सलाह लेने पहोंचे। सलाहकार साहब न एक सरल कहानी के माध्यम सेे बड़ी आसानी से इस स्वभाव को और उसके इलाज को बताया। गुजरात मे शादी मे जो भोजन बनता है उस मे दाल सब से महत्व् की होती है। सही दाल न बनने पर सारा भोजन ही व्यर्थ होजाता है। रसोइया दाल बनता है और घर के एक बुजुर्ग के पास जाता है और कहता है ” बाबा ये दाल चख कर बताएँगे की कैसी है?” बाबा ने दाल चखी और क्योंकि दाल एक महत्त्व का भोजन है इसलिए बाबा बोले ” बेटा दाल तो अच्छि है पर नमक थोड़ा कम है।” रसोइया भी प्रोफेशनल था। वो झट से गया और नमक का डिब्बा ले आया और बाबा से कहा ” बाबा लीजिए जितना भी नमक कम लग...

टीम-वर्क

एक जंगल मे एक शेर रहता था। सब उसे शेरा के नाम से बुलात्ते थे. शेरा नाम का शेर जंगल के सबसे कुशल और क्रूर शिकारियों में गिना जाता था . अपने दल के साथ उसने न जाने कितने भैंसों , हिरणो और अन्य जानवरों का शिकार किया था . धीरे -धीरे उसे अपनी काबिलियत का घमंड होने लगा . एक दिन उसने अपने साथियों से कहा …” आज से जो भी शिकार होगा , उसे सबसे पहले मैं खाऊंगा …उसके बाद ही तुममे से कोई उसे हाथ लगाएगा .  शेरा के मुंह से ऐसी बातें सुन सभी अचंभित थे … तभी एक बुजुर्ग शेर ने पुछा ,“ अरे …तुम्हें आज अचानक क्या हो गया … तुम ऐसी बात क्यों कर रहे हो ..?”, शेरा बोला ,” मैं ऐसी -वैसी कोई बात नहीं कर रहा … जितने भी शिकार होते हैं उसमे मेरा सबसे बड़ा योगदान होता है … मेरी ताकत के दम पर ही हम इतने शिकार कर पाते हैं ; इसलिए शिकार पर सबसे पहला हक़ मेरा ही है …’ अगले दिन , एक सभा बुलाई गयी . अनुभवी शेरों ने शेरा को समझ...

अंधा घोड़ा

    शहर के नज़दीक बने एक farm house में दो घोड़े रहते थे. दूर से देखने पर वो दोनों बिलकुल एक जैसे दीखते थे , पर पास जाने पर पता चलता था कि उनमे से एक घोड़ा अँधा है. पर अंधे होने के बावजूद farm के मालिक ने उसे वहां से निकाला नहीं था बल्कि उसे और भी अधिक सुरक्षा और आराम के साथ रखा था. अगर कोई थोडा और ध्यान देता तो उसे ये भी पता चलता कि मालिक ने दूसरे घोड़े के गले में एक घंटी बाँध रखी थी, जिसकी आवाज़ सुनकर अँधा घोड़ा उसके पास पहुंच जाता और उसके पीछे-पीछे बाड़े में घूमता. घंटी वाला घोड़ा भी अपने अंधे मित्र की परेशानी समझता, वह बीच-बीच में पीछे मुड़कर देखता और इस बात को सुनिश्चित करता कि कहीं वो रास्ते से भटक ना जाए. वह ये भी सुनिश्चित करता कि उसका मित्र सुरक्षित; वापस अपने स्थान पर पहुच जाए, और उसके बाद ही वो अपनी जगह की ओर बढ़ता. दोस्तों, बाड़े के मालिक की तरह ही भगवान हमें बस इसलिए...

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