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Hindi- story

बैंगन का भरता

बैंगन का भरता

जिंदगी के कीमती वर्ष HR में गुजारने के बाद भी असमंजस ही रहता है की मुझे Employer की तरफ या Employee की तरफ रहना चाहीए? दोनों के बीच का बेलैंस तो दूर की ही बाद है। इसे समझने का इस कहानी से अच्छा ओर क्या तरीका हो सकता है।

एक राजा था, जिसका रसोइया सीताराम था। सीताराम काफी वर्षों से राजा को अच्छे से अच्छा खाना बनाता एवं राजा का काफी करीबी माना जाता था।

एक दिन सीताराम ने बैंगन का भरता बनाया । राजा उस दिन काफी खुश था । राजा ने बैंगन के भरते की काफी तारीफ की। राजा ने कहा “सीताराम, क्या भरता बनाया है” ! सीताराम ने भी बैंगन की काफी तारीफ की और कहा साहब बैगन चीज़ ही ऐसी है – गोल गोल , मोटा मोटा…

फिर कुछ दिन बाद सीताराम ने वही बैंगन का भरता बनाया। वही स्वाद था । परंतु आज राजा का मन खुश न था। राजा ने कहा ” सीताराम क्या भरता बनाया है”! सीताराम ने भी बैंगन की बुराई की और कहा साहब बैंगन चीज़ ही ऐसी है – गोल गोल , मोटा मोटा…

राजा परेशान हो कर बोला “सीताराम उस दिन तूम बैंगन की तारीफ कर रहे था और आज उसी बैंगन की बुराई कर रहे हो “।
इस पर सीताराम ने खूब अच्छा जवाब दिया- उसने ने कहा “महाराज मै आप का दिया खाता हूँ बैंगन का दिया नहीं”।

दोस्तो संदेश सीधा है आगे आप जैसे समझदारो के लिए इसारा ही काफी है……

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apteka mujchine for man ukonkemerovo woditely driver.

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