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Hindi- story

कॉर्पोरेट पोलिटिक्स

कॉर्पोरेट पोलिटिक्स

 

हम  अक्सर बात करते है कि कंपनी मे बहुत पॉलिटिक्स हे, लोग बहुत गेम खेलते है, मजा नहीं आता……

पर सबसे बड़ा सवाल ये है कि लोग ये कहा से सीखते है, कोई स्कूल मे या कॉलेज मे तो पढ़ाया नहीं जाता । फिर ये कहा से आता है? बहुत सोचा तब कही मै इस समस्या की नींव तक पहुच सका।

एक बार शाम को घर पंहुचा। श्रीमती ने खाने के सुझाव मांगे औऱ मेरे हर सुझावो को एक या दुसरे कारण से नकार दिए गए। मैने कहा, आलू बना लो – कारण दिया आलू गैस करते हैं। मैने कहा भिन्डी बना लो- जवाब दिया अभी तो खाइ थी। औऱ अंत मे श्रीमति ने कहा बैगन कैसा रहेगा? मेरे पास कोई जवाब नहीं था बल्कि हाँ ही कहना था। श्रीमति हँसती हुई  डिनर बनाने चली गई।

डिनर टेबल पर जब खाना आया, हमारी बेटी चिल्लाई, ” मम्मी ये क्या सब्जी बनाई है? You don’t have choice”.

दोस्तों यही से बच्चे पॉलिटिक्स की A B C D सिखते हैं। बेटी के सवाल पर श्रीमति ने जवाब दिया ” बेटा ये पापा की choice थी।”

God, एक “हाँ” कहने की मुझे क्या कीमत चुकानी पड़ी…..

अब हम कही जाते है, कपडे लेने, तो बेटी कहती है “पापा रहने दो, You don’t have choice”
चप्पल लेने गए , “पापा रहने दो, You don’t have choice”….
हद तो तब हुई की जब हम बेटी के लिए लड़का देखने गए…..! अब आप समझ गए होंगे बेटी मुझे ले के नहीं गई , क्यूँ की “पापा You don’t have choice”…..

दोस्तों श्रीमति इस कहानी मे एक गेस्ट की तरह आई….पर……This is what Corporate Politics is……If you find yourself in story, do share with others.

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